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وقتی که تو نیستی
کوچه یادش می رود
قبل از تولد شب خاموش
از حضور اسم تو بود
که تا حدودی روشن می شد
برگرد
و دستانت را
بر تن بیهوده دیوار ها بکش
تا نور خالص آبی ات
آرام و نرم
از لابه لای درز آجرها عبور کند
که سایه ی روشن سحرگاهی
اخرین قصه گوی تاریکی باشد
معظمه جهانشاهی